सोशल मीडिया पर इन दिनों स्वास्थ्य और फिटनेस को लेकर एक नया ट्रेंड काफी चर्चा में है, जिसे ‘लिम्फेटिक वॉकिंग’ कहा जाता है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसके लिए आपको न तो सुबह जल्दी उठकर जिम जाने की जरूरत है, न ही पसीना बहाने वाली भारी भरकम एक्सरसाइज या हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट करने की।
इंटरनेट पर किए जा रहे दावों के अनुसार, यह बेहद आसान तरीका शरीर की सूजन कम करने, पेट फूलने (ब्लोटिंग) की समस्या से राहत दिलाने और शरीर को प्राकृतिक रूप से डिटॉक्स करने में मददगार है। आलिया भट्ट से लेकर हैली बीबर तक कई मशहूर हस्तियां लिम्फेटिक ड्रेनेज को लेकर बात कर रही हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या सच में पैदल चलने का यह खास तरीका इतना फायदेमंद है या यह सिर्फ एक और इंटरनेट भ्रम है, इसे लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अपनी महत्वपूर्ण राय साझा की है।
लिम्फेटिक वॉकिंग के विज्ञान को समझने के लिए पहले हमारे शरीर के लिम्फेटिक सिस्टम यानी लसीका तंत्र को समझना जरूरी है। यह प्रणाली हमारे शरीर के एक सफाई नेटवर्क की तरह काम करती है, जो ऊतकों से अतिरिक्त तरल पदार्थ को निकालकर रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाती है। हमारे रक्त संचार तंत्र में हृदय एक पंप की तरह काम करता है, लेकिन लिम्फेटिक सिस्टम में ऐसा कोई केंद्रीय पंप नहीं होता। यह पूरी तरह से हमारी मांसपेशियों की हलचल, दबाव में होने वाले बदलाव और हमारी सांस लेने की प्रक्रिया पर निर्भर करता है।
लिम्फेटिक वॉकिंग हमारी सामान्य सैर का ही एक उन्नत रूप है। इसमें आपको एक आरामदायक लेकिन तेज गति से चलना होता है, अपनी पीठ को बिल्कुल सीधा रखना होता है, हाथों को स्वाभाविक रूप से आगे-पीछे हिलाना होता है और सबसे महत्वपूर्ण बात, डायाफ्राम से गहरी सांसें लेनी होती हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि मोबाइल देखते हुए या कंधे झुकाकर चलने की पुरानी आदत को छोड़कर पूरी तरह से सजग होकर चलना ही लिम्फेटिक वॉकिंग है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब हम सही मुद्रा में तेज गति से चलते हैं, तो हमारे पैरों की मांसपेशियां एक पंप की तरह काम करती हैं, जो लिम्फ के बहाव को ऊपर की तरफ धकेलती हैं। फोर्टिस अस्पताल की इंटरनल मेडिसिन कंसल्टेंट डॉ. शोभा मनीष इटोलीकर बताती हैं कि मांसपेशियों के सिकुड़ने और गहरी सांसें लेने से पेट और छाती के बीच एक प्राकृतिक दबाव बनता है।
यही दबाव शरीर में जमा अतिरिक्त पानी और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में सहायता करता है। इससे न केवल शरीर की सूजन और जोड़ों की अकड़न कम होती है, बल्कि ऊर्जा के स्तर में भी सुधार होता है। जो लोग दिन भर कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं, लंबे समय तक यात्रा करते हैं या जिन्हें भारी व्यायाम करने में कठिनाई होती है, उनके लिए यह तकनीक एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है।
इन तमाम फायदों के बावजूद, इंटरनेट पर किए जाने वाले जादुई दावों की सच्चाई थोड़ी अलग है। अरियन मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल के फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. सौरव कुमार मंडल के अनुसार, एक स्वस्थ व्यक्ति जिसके शरीर का लिम्फेटिक सिस्टम सामान्य रूप से काम कर रहा है, उसे किसी विशेष डिटॉक्स प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती। इसके अलावा, वजन कम करने के लिए यह कोई शॉर्टकट या जादुई नुस्खा नहीं है। जिन लोगों को लिम्फेडेमा या लिम्फ नोड्स से जुड़ी गंभीर चिकित्सीय समस्याएं हैं, उन्हें डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसे अपने उपचार का हिस्सा बनाना चाहिए।
बाकी सभी के लिए विशेषज्ञों की सबसे बड़ी और आसान सलाह यही है कि आप दिन भर एक ही जगह बैठे रहने के बजाय शारीरिक रूप से सक्रिय रहें और सैर करें। अचानक जोश में आकर बहुत अधिक या गलत तरीके से चलने से बचें, क्योंकि इससे मांसपेशियों में दर्द या ऐंठन हो सकती है। असल में लिम्फेटिक वॉकिंग का सबसे बड़ा फायदा यही है कि यह आपको सजगता के साथ चलने के लिए प्रेरित करती है।
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