लखनऊ के इको गार्डन में सहकारी कर्मचारियों का अनवरत धरना जारी, रबी की बुवाई और धान खरीद पर असर

Neeraj Yadav Swatantra
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लखनऊ के इको गार्डन में सहकारी कर्मचारियों का अनवरत धरना जारी, रबी की बुवाई और धान खरीद पर असर

राज्य कर्मचारी का दर्जा और बकाया वेतन भुगतान की मांग को लेकर 22 अक्टूबर से प्रदेशभर के सहकारी सचिव एवं कर्मचारी कर रहे प्रदर्शन, किसानों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इको गार्डन में प्रदेशभर के सहकारी समिति सचिवों एवं कर्मचारियों का अनवरत धरना-प्रदर्शन जारी है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सहकारी कर्मचारी 22 अक्टूबर से लगातार आंदोलनरत हैं। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में राज्य कर्मचारी का दर्जा दिए जाने और लंबे समय से बकाया वेतन का भुगतान सुनिश्चित करना शामिल है।

प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पहुंचे सहकारी सचिव एवं कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी सेवाओं और आर्थिक समस्याओं का उचित समाधान नहीं किया गया है। ऐसे में उन्हें अपने अधिकारों और बकाया भुगतान के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।

इस आंदोलन का असर अब प्रदेश की कृषि व्यवस्था पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। वर्तमान समय में रबी सीजन की बुवाई का महत्वपूर्ण दौर चल रहा है। वहीं, दूसरी ओर किसानों के धान की सरकारी खरीद भी जारी है। सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली प्रभावित होने से खाद वितरण, किसानों से जुड़ी सेवाओं और धान खरीद की व्यवस्थाओं पर असर पड़ सकता है।

खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी समितियां किसानों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र हैं। खाद की उपलब्धता, कृषि संबंधी सुविधाओं और सरकारी खरीद व्यवस्था में इनकी अहम भूमिका रहती है। ऐसे में यदि कर्मचारियों का आंदोलन लंबा खिंचता है तो रबी की बुवाई और धान खरीद की प्रक्रिया प्रभावित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

एक तरफ किसान रबी की फसल की समय से बुवाई के लिए खाद और अन्य कृषि सुविधाओं की उम्मीद लगाए बैठे हैं, वहीं दूसरी तरफ सहकारी कर्मचारियों का आंदोलन जारी है। ऐसे में सरकार के सामने कर्मचारियों की मांगों और किसानों के हितों के बीच संतुलन बनाते हुए जल्द समाधान निकालने की चुनौती है।

अब देखना होगा कि प्रदेश सरकार सहकारी कर्मचारियों की मांगों पर क्या निर्णय लेती है और इस आंदोलन का समाधान कब तक निकलता है, ताकि किसानों को खाद, धान खरीद और अन्य सहकारी सुविधाओं के लिए परेशानियों का सामना न करना पड़े।


📰 मूल खबर यहां पढ़ें — aavaj.com

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